सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
74માં સ્વતંત્રતા દિવસની આપ સૌને શુભકામનાઓ. 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ।
हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा ।।
ग़ुर्बत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में ।
समझो वहीं हमें भी दिल है जहाँ हमारा ।।
परबत वह सबसे ऊँचा, हम्साया आसमाँ का ।
वह संतरी हमारा, वह पासबाँ हमारा ।।
गोदी में खेलती हैं इसकी हज़ारों नदियाँ ।
गुल्शन है जिनके दम से रश्क-ए-जनाँ हमारा ।।
ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वह दिन हैं याद तुझको ।
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ।।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ।
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा ।।
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा सब मिट गए जहाँ से ।
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा ।।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ।
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा ।।
इक़्बाल! कोई महरम अपना नहीं जहाँ में ।
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा ।।
- इकबाल
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